दिलीप कुमार (Dilip Kumar) की जीवनी -Wikipedia/Biography in Hindi

जीवन परिचय

दिलीप कुमार का असली नाम मुहम्मद युसुफ़ खान है। दिलीप कुमार का जन्म 10 दिसंबर, 1922 पेशावर(पाकिस्तान) में हुआ था।उनका  जन्म 12 बच्चों के एक पश्तून परिवार में हुआ था. सन 1930  उनके पिता मुंबई आकर बस गए थे।जिसके बाद उन्होंने ब्रिटिश सेना की कैंटीन में काम करना शुरू कर दिया.

सन 1942 में उनकी मुलाकात देवकी रानी (बॉम्बे टाकिज की मालकिन) से हुई.जिसके बाद उन्होंने कॉन्ट्रैक्ट पर साइन किया.माना जाता है कि देवकी रानी के कहने पर उन्होंने अपना नाम बदल कर दिलीप कुमार रख लिया .

उन्होने अपना नाम बदल कर दिलीप कुमार कर दिया ताकि उन्हे हिन्दी फ़िल्मो में ज्यादा पहचान और सफलता मिले।कुमार ने अपना नाम बदल लिया क्योंकि उस समय भारतीय सिनेमा में हिंदू युग था।

Dilip Kumar Biography/Wikipedia
Dilip Kumar Biography/Wikipedia

जीवनी/बायोग्राफी/विकिपीडिया

 

नाम दिलीप कुमार (मुहम्मद युसुफ़ खान)
जन्म 10 दिसंबर, 1922
मृत्यु 07 जुलाई 2021
जन्मस्थान पेशावर (पाकिस्तान )
पिता का नाम लाला गुलाम सरवर
माता का नाम आयेशा बेगम
शिक्षा बार्नस् स्कूल,महाराष्ट्र
फ़िल्मी कैरियर 1944 से 1998 तक करीब 65 फिल्म

करियर

उनकी पहली फ़िल्म ‘ज्वार भाटा’ थी, जो 1944 में आई जिसपे बहुत ध्यान नहीं दिया गया  ।

लेकिन 1949 में बनी फ़िल्म अंदाज़  की सफलता ने उन्हे प्रसिद्धी दिलाई, इस फ़िल्म में उन्होने राज कपूर और नर्गिस के साथ काम किया।

Dilip Kumar and Raj Kapoor
Dilip Kumar and Raj Kapoor

 ट्रेजिडी किंग  के नाम से हुए मशहूर

दिदार (1951) और देवदास (1955) जैसी फ़िल्मो में दुखद भूमिकाओं के मशहूर होने के कारण उन्हे ट्रेजिडी किंग कहा गया।

मुगल-ए-आज़म (1960) में उन्होने मुग़ल राजकुमार जहांगीर की भूमिका निभाई। यह फ़िल्म पहले श्वेत और श्याम थी और 2004 में रंगीन बनाई गई।

 

 

उन्होने 1961 में गंगा जमुना फ़िल्म का निर्माण भी किया, जिसमे उनके साथ उनके छोटे भाई नासीर खान ने काम किया।

1970, 1980 और 1990 के दशक में उन्होने कम फ़िल्मो में काम किया। इस समय की उनकी प्रमुख फ़िल्मे थी: विधाता (1982), दुनिया (1984), कर्मा (1986), इज्जतदार (1990) और सौदागर (1991)। 1998 में बनी फ़िल्म किला उनकी आखरी फ़िल्म थी। उन्होने रमेश सिप्पी की फ़िल्म शक्ति में अमिताभ बच्चन के साथ काम किया। इस फ़िल्म के लिए उन्हे फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार भी मिला।

विवाह

दिलीप कुमार ने अभिनेत्री सायरा बानो से 1966 में विवाह किया। विवाह के समय दिलीप कुमार 44 वर्ष और सायरा बानो 22 वर्ष की थीं। 1980 में कुछ समय के लिए आसमां से दूसरी शादी भी की थी।

Dilip Kumar Sayra Bano Marriage
Dilip Kumar Sayra Bano Marriage

पुरस्कार

दिलीप कुमार हिंदी फिल्म जगत के सर्वश्रेष्ठ अभिनेताओं में से एक हैं वह बॉलीवुड फिल्म जगत के पहले सर्वोच्च सम्मान फिल्मफेयर पुरस्कार जितने वाले अभिनेता हैं.

अभी तक इस सम्मान को सबसे अधिक बार प्राप्त करने वाले वो इकलौते अभिनेता हैं.उन्होंने यह कारनामा 8 बार किया है जिसे आज तक कोई और अभिनेता या अभिनेत्री तोड़ नहीं पाए हैं.

1954 सर्वश्रेष्ठ अभिनेता दाग (फिल्मफेयर)

1956 सर्वश्रेष्ठ अभिनेता आज़ाद (फिल्मफेयर)

1957 सर्वश्रेष्ठ अभिनेता देवदास (फिल्मफेयर)

1958 सर्वश्रेष्ठ अभिनेता नया दौर (फिल्मफेयर)

1961 सर्वश्रेष्ठ अभिनेता कोहिनूर (फिल्मफेयर)      

1965 सर्वश्रेष्ठ अभिनेता लीडर (फिल्मफेयर)

1968 सर्वश्रेष्ठ अभिनेता राम और श्याम (फिल्मफेयर)

1983 सर्वश्रेष्ठ अभिनेता शक्ति (फिल्मफेयर)      

1961 दूसरी सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के लिए सर्टिफिकेट ऑफ मेरिट गंगा जमुना               

1995  दादा साहब फाल्के पुरस्कार

1994 लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार

2004 भारतीय सिनेमा में उत्कृष्ट योगदान के लिए IIFA अवार्ड

2006 में राष्ट्रीय पुरस्कार,

1980 में उन्हें सम्मानित करने के लिए मुंबई का शेरिफ घोषित किया गया। 

दिलीप कुमार को भारतीय फ़िल्मों में यादगार अभिनय करने के लिए 1995 में फ़िल्मों का सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया इसके अलावा पद्म भूषण, पद्म विभूषण और 1998 में उन्हें पाकिस्तान के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार निशान-ए-इम्तियाज से सम्मानित किया गया, जो सम्मान प्राप्त करने वाले दूसरे भारतीय (मोरारजी देसाई के बाद) बन गए।। इसके अलावा 2000 से 2006 तक उन्होंने भारत की संसद के ऊपरी सदन राज्य सभा के सदस्य के रूप में कार्य किया।

Dilip Kumar/Sayra Bano Filmfare Award
Dilip Kumar/Sayra Bano Filmfare Award

वापसी

एक विस्तारित अंतराल के बाद दिलीप  कुमार ने मनोज कुमार की फिल्म क्रांति (1981) के साथ वापसी की.

Dilip Kumar and Manoj Kumar
Dilip Kumar and Manoj Kumar

इसके बाद उन्होंने सुभाष घई की विधाता (1982), कर्मा (1986), और सौदागर (1991) में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं।

उन्हें रमेश सिप्पी की शक्ति (1982) में उनके प्रदर्शन के लिए भी जाना जाता था।

दिलीप कुमार की आखिरी फिल्म पारिवारिक ड्रामा किला (1998) थी।

1994 में कुमार को लाइफटाइम अचीवमेंट के लिए फिल्मफेयर अवार्ड मिला। अगले वर्ष उन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार दिया गया, जो सिनेमाई उत्कृष्टता के लिए भारत का सर्वोच्च पुरस्कार है।

 

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