स्मिता सभरवाल(Smita Sabharwal) की जीवनी – Wiki/wikipedia/Biography in Hindi

स्मिता सभरवाल(Smita Sabharwal Wiki/wikipedia/Biography in Hindi) की जीवनी

कौन हैं

महज 23 साल की उम्र में आईएएस बनने वाली स्मिता सभरवाल (smita-sabharwal)को भारत की सबसे कम उम्र की आईएएस अधिकारी होने का खिताब भी हासिल है।

साल 2000 में अपने दूसरे प्रयास में यूपीएससी परीक्षा ऑल इंडिया में चौथी रैंक के साथ पास की।

पीपुल्स ऑफिसर

नागरिक मुद्दों को संबोधित करने के लिए उन्हें पीपुल्स ऑफिसर के रूप में जाना जाता है। वह मुख्यमंत्री कार्यालय में नियुक्त होने वाली पहली महिला आईएएस अधिकारी हैं।

नाम स्मिता सभरवाल
जन्म 19 जून 1977
जन्मस्थान दार्जिलिंग
पिता कर्नल प्रणब दास
माता पूरबी दास
पति अकुन सभरवाल
बच्चे नानक सभरवाल(पुत्र), भूविस सभरवाल(पुत्री)
पसंदीदा भोजन डोसा,सांभर,इडली
Smita Sabharwal
Smita Sabharwal

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

स्मिता का जन्म पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में एक बंगाली परिवार में हुआ था। उनके पिता एक सेना अधिकारी (कर्नल) थे जिनका नाम कर्नल प्रणब दास है और उनकी माताजी का नाम पूरबी दास है।

उनके पिता भारतीय सेना में कर्नल के पद से सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति के बाद, उनके पिता हैदराबाद में बस गए जहाँ उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा सेंट एन हाई स्कूल, सिकंदराबाद से की।वह 1999 में ICSE परीक्षा में ऑल इंडिया टॉपर थीं।

उन्होंने हैदराबाद के सेंट फ्रांसिस कॉलेज फॉर विमेन से वाणिज्य में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। वह 22 वर्ष की थीं, जब उन्होंने 2000 में संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण की और अखिल भारतीय स्तर पर चौथी रैंक हासिल की।

2002 में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी, मसूरी में प्रशासनिक प्रशिक्षण पूरा करने के बाद, स्मिता को अपनी परिवीक्षा (Probation) के दौरान आदिलाबाद जिले में प्रशिक्षित किया गया था।

खेलकुद

स्मिता ने अंडर-16 बैडमिंटन वर्ग में कर्नाटक का प्रतिनिधित्व भी किया और एथलेटिक चैंपियनशिप में भाग लिया।

Smita Sabharwal
Smita Sabharwal

 

हालाँकि, स्नातक स्तर की पढ़ाई तक वह कभी भी सिविल सेवाओं में प्रवेश नहीं करना चाहती थीं, लेकिन उनके पिता के प्रोत्साहन ने उन्हें सिविल सेवाओं में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।

उल्लेखनीय कार्य

अपने कार्यकाल के दौरान स्मिता कई बड़ी-बड़ी जिम्मेदारियां संभाली हैं।

उन्होंने 2011 में करीमनगर जिले की कमान संभाली।जिला कलेक्टर के रूप में करीमनगर और मेडक में उनके कार्यकाल की कई लोगों ने प्रशंसा की है।

विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए सॉफ़्टवेयर के माध्यम से 2010 से सरकारी स्कूलों के प्रदर्शन की निगरानी ने उनके कार्यकाल के दौरान करीमनगर और मेडक जिलों को राज्य में शीर्ष पर पहुंचा दिया।

उन्होंने वहां स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रभाव डाला। जन प्रतिनिधियों की मदद से करीमनगर टाउन में चौड़ी सड़कें, सुनियोजित यातायात चौराहे, बस स्टेशन, शौचालय और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं जोड़ी गईं।

स्मिता सभरवाल ने सरकार से पावरलूमों को छह घंटे से अधिक बिजली आपूर्ति करने का अनुरोध किया क्योंकि बुनकरों को बिजली कटौती के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

वह चितूर में सब-कलेक्टर रहीं, इसके अलावा वह कडप्पा रूरल डेवलपमेंट एजेंसी की प्रोजेक्ट डायरेक्टर, वारंगल की नगर निगम कमिश्नर और कुरनूल की संयुक्त कलेक्टर रही हैं।

वहां उन्होंने स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। जन प्रतिनिधियों की सहायता से, करीमनगर शहर ने व्यापक सड़कों, व्यवस्थित रूप से नियोजित यातायात जंक्शनों, बस-स्टॉप, शौचालयों और अन्य सार्वजनिक उपयोगिताओं के रूप में नवीनीकरण का अनुभव किया।

फंड योर सिटी अभियान

उन्होंने वारंगल में फंड योर सिटी अभियान चलाया। इस अभियान के कारण, सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से ट्रैफिक जंक्शन, फुट ओवरब्रिज, बस स्टॉप, पार्क जैसी कई सुविधाएं बनाई गईं।

उन्होंने विशाखापत्तनम में वाणिज्यिक कर के उपायुक्त के रूप में भी काम किया।

स्मिता सभरवाल जी को वर्ष 2015 में अपने काम में नई तकनीक और काम को गति देने के लिए इंडियन एक्सप्रेस की ओर से देवी पुरस्कार दिया गया था।

स्मिता सभरवाल पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के साथ भी काम कर चुकी हैं।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार की तरफ से वर्ष 2013 में, सरकार की पहल इंटरनेट द्वारा स्वास्थ्य संबंधी चीजों को इंटरनेट पर उपलब्ध कराना और उसे आसान बनाने के संबंध में उन्हें e-india health category में अवार्ड दिया गया।

Smita Sabharwal
Smita Sabharwal

उन्होंने आम चुनाव 2015 के दौरान मेडक के जिला कलेक्टर के रूप में भी कार्य किया और उच्च मतदान प्रतिशत दर्ज करते हुए सफलतापूर्वक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराए।उन्होंने मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए वोटर पांडुगा नामक कार्यक्रम सफलतापूर्वक शुरू किया।

 

 

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